ख्वाजा के दर उभरने लगी विरासत

अजमेर । भारत सरकार द्धारा प्रसाद योजना के लिए दूसरे चरण के कार्य प्रस्ताव शीघ्र प्राप्त किए जाएंगे। इसके तहत प्रथम चरण के कार्यों की प्रगति व समीक्षा रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसमें दरगाह ख्वाजा साहब अजमेर में किए जाने वाले कार्यों के लिए सियासी तौर पर माना जाता था कि यहां पर किसी प्रकार का कार्य किया जाना संभव नहीं है, सिर्फ घोषणाएं की जा रही हैं किन्तु वर्तमान में जारी कार्यों ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया गया है। इस सबंध में दरगाह कमेटी की ओर से शीघ्र ही एक रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भिजवाई जा रही है।
आपको बता दें कि  सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती गरीब नवाज की अजमेर स्थित दरगाह शरीफ 8 सदियों से हिन्दुस्तान में गंगा जमनी तहजीब की साक्षी है। जहां पर बिला मजहब के ख्वाजा साहब के चाहने वाले अपने अकीदत और मोहब्बत के नजराने पेश करते आए हैं। इन नजरानों को अपनी चाहत और खुशी से जहां सलातीनेवक्त ने पेश किया वही क्वीन विक्टोरिया, नवाब और साहिबे हैसियत हजरात ने भी ने इस में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। 
दरगाह शरीफ में एक दर्जन से ज्यादा तारिखी इमारात हैं जो अपनी भव्यता और और उस दौर के फन्नी महारत की गवाह हैं। वक्त और हालात के साथ इन इमारतों ने दरगाह शरीफ की तारीख को बुलंद व बाला किया जो आज तक जारी है। इसी कड़ी में हुकूमते हिन्द की ओर से हिन्दुस्तान की इन विरासत वाली ऐतिहासिक इमारतों के सुरक्षा व संरक्षण की दृष्टि से प्रसाद योजना का आगाज किया गया। राजस्थान से प्रसाद योजना में 40 करोड़ की रकम को मंजूर करते हुए विश्व के जगत पिता ब्रहमा मंदिर और अन्य स्थानों को शामिल किया गया। वही दूसरी ओर अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की मजार शरीफ की इमारतों के जिर्णोद्धार के लिए इसका चयन किया गया।
प्रसाद योजना में ख्वाजा साहब की दरगाह तकरीबन 5 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत हुए। कार्य के प्रारंभ होने मे कुछ विलम्ब रहा, लेकिन वर्तमान में दरगाह कमेटी और राजस्थान सरकार के सहयोग से झालरा परिसर में 5 छतरियों का कार्य पूरा हो चुका है। इन छतरियों की खूबी है कि यह तापमान को 5 से 7 डिग्री तक कम करता है। यह फायर प्रूफ है। इसके अतिरिक्त इस मटेरियल पर 36 इंच बारिश को सहन करने की क्षमता है। इसके अलावा वहां लगाया गया लोहे का स्ट्रेचर तेज हवा में 120 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार में भी स्थापित रहने की क्षमता रखता है। 
निज़ाम गेट—  दरगाह शरीफ का मुख्य दरवाजा निजाम गेट है, जिसे निज़ाम हैदाराबाद ने 1915 में बनवाया था। लाल और सफेद पत्थर से निर्मित इस दरवाजे की खूबसूरती अपनी मिसाल आप रखती थी। लेकिन वक्त से साथ इस दरवाजे के उपर रंग और आरास लगा दिया गया था। जिससे यह अपनी मूल सुंदरता खो सा चुका था। लेकिन इस दरवाजे को वर्तमान में प्रसाद योजना तहत पुनः अपने मूलस्वरूप में लाया जा रहा है। इस का कार्य प्रगति पर है। वर्तमान में जारी कार्य को देख कर आज की पीढ़ी के लोग गौरांवित और हैरान है कि किस तरह हमारे बुर्जुगों ने इस विरासत को तामिर करवाया जो आज हमारे लिए एक अजूबे की तरह है।
अकबरी मस्जिद —  प्रसाद योजना के अन्तर्गत ही तीसरा कार्य मुगल बादशाह अकबर की ओर से निर्मित अकबरी मस्जिद का जिर्णोद्धार का कार्य जारी है। इस मस्जिद पर भी पिछली कई दहाइयों से सफेद और हरा रंग किया जा रहा था, जिससे की यह अपना मूल स्वरूप खो चुकी थी। लेकिन प्रसाद योजना के तहत जब फसाड का कार्य किया तो इमारत में लाल पत्थर, मार्बल और फायर टाईल्स निकल के सामने आए हैं जो सबको हैरान करने वाला है। सूत्रों के मुताबिक यदि अकबरी मस्जिद को सही तरीके जिर्णाेद्धार और इल्यूमिनेशन के साथ प्लान किया जाए तो यह मस्जिद विश्व विरासत में शामिल होकर एशिया की प्रथम सबसे सुन्दर मस्जिदों में अपना स्थान आसानी से बना सकती है। 

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